“जन्नत को दोज़ख़ बनाने में पाकिस्तान का हाथ रहा,
पीठ में छूरा घोंपने में आतंकवाद का साथ रहा,
वादी की चाहत में सैंतालिस से जतन किये,
अपने नापाक इरादों से निज राष्ट्र का पतन किए,
मासूमों को हथियार थमा, विष का बेल जो बोते हैं,
हथियार,आतंकी हमले इनके खेल खिलौनें होते हैं,
हूर और जन्नत पाने को आतंकी बन जाते हैं,
सेना के आगे हर बार ही मुँह की खाते हैं,
निन्यान्वे मई माह में फिर से धावा बोल दिया,
चढ़कर कारगिल की चोटी पर नया मोर्चा खोल दिया,
दुर्गम चोटी को सैनिक छीन के वापस ले आये ,
गीदड़ों को जाबाज़ सिपाही अपनी ताकत दिखलाये
भारत ने फिर से एक बार विजय पताका फ़हराया,
जीत का यह सुअवसर कारगिल विजय दिवस कहलाया”

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